يوم يقول المنافقون والمنافقات للذين آمنوا، وهم على الصراط: انتظرونا نستضئْ من نوركم، فتقول لهم الملائكة: ارجعوا وراءكم فاطلبوا نورًا (سخرية منهم)، فَفُصِل بينهم بسور له باب، باطنه مما يلي المؤمنين فيه الرحمة، وظاهره مما يلي المنافقين من جهته العذاب.
مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف
تفسير الجلالين
«يوم يقول المنافقون والمنافقات للذين آمنوا انظرونا» أبصرونا وفي قراءة بفتح الهمزة وكسر الظاء: أمهلونا «نقتبس» نأخذ القبس والإضاءة «من نوركم قيل» لهم استهزاءً بهم «ارجعوا وراءكم فالتمسوا نورا» فرجعوا «فضرب بينهم» وبين المؤمنين «بسور» قيل هو سور الأعراف «له باب باطنه فيه الرحمة» من جهة المؤمنين «وظاهره» من جهة المنافقين «من قبله العذاب».
जिस दिन कपटाचारी पुरुष और कपटाचारी स्त्रियाँ मोमिनों से कहेंगी, "तनिक हमारी प्रतिक्षा करो। हम भी तुम्हारे प्रकाश मे से कुछ प्रकाश ले लें!" कहा जाएगा, "अपने पीछे लौट जाओ। फिर प्रकाश तलाश करो!" इतने में उनके बीच एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतर का हाल यह होगा कि उसमें दयालुता होगी और उसके बाहर का यह कि उस ओर से यातना होगी
ترجمة المعاني ليست قرآنًا، بل محاولة لنقل معناه إلى لسان آخر.