هود : ١٧
مكية الجزء ١٢ صفحة ٢٢٣معاني المفردات
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التفسير الميسر
أفمَن كان على حجة وبصيرة من ربه فيما يؤمن به، ويدعو إليه بالوحي الذي أنزل الله فيه هذه البينة، ويتلوها برهان آخر شاهد منه، وهو جبريل أو محمد عليهما السلام، ويؤيد ذلك برهان ثالث من قبل القرآن، وهو التوراة -الكتاب الذي أنزل على موسى إمامًا ورحمة لمن آمن به-، كمن كان همه الحياة الفانية بزينتها؟ أولئك يصدِّقون بهذا القرآن ويعملون بأحكامه، ومن يكفر بهذا القرآن من الذين تحزَّبوا على رسول الله صلى الله عليه وسلم فجزاؤه النار، يَرِدُها لا محالة، فلا تك -أيها الرسول- في شك من أمر القرآن وكونه من عند الله تعالى بعد ما شهدت بذلك الأدلة والحجج، واعلم أن هذا الدين هو الحق من ربك، ولكن أكثر الناس لا يصدِّقون ولا يعملون بما أُمروا به. وهذا توجيه عام لأمة محمد صلى الله عليه وسلم.
مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف
تفسير الجلالين
«أفمن كان على بيِّنة» بيان «من ربه» وهو النبي أو المؤمنون، وهي القرآن «ويتلوه» يتبعه «شاهد» له بصدقه «منه» أي من الله وهو جبريل «ومن قبله» القرآن «كتاب موسى» التوراة شاهد له أيضا «إماما ورحمة» حال كمن ليس كذلك؟ لا «أولئك» أي من كان على بينة «يؤمنون به» أي بالقرآن فلهم الجنة «ومن يكفر به من الأحزاب» جميع الكفار «فالنار موعده فلا تَكُ في مِرْيَةِ» شك «منه» من القرآن «إنه الحق من ربك ولكن أكثر الناس» أي أهل مكة «لا يؤمنون».
جلال الدين المحلي وجلال الدين السيوطي
फिर क्या वह व्यक्ति जो अपने रब के एक स्पष्ट प्रमाण पर है और स्वयं उसके रूप में भी एक गवाह उसके साथ-साथ रहता है - और इससे पहले मूसा की किताब भी एक मार्गदर्शक और दयालुता के रूप में उपस्थित रही है- (और वह जो प्रकाश एवं मार्गदर्शन से वंचित है, दोनों बराबर हो सकते है) ऐसे ही लोग उसपर ईमान लाते है, किन्तु इन गिरोहों में से जो उसका इनकार करेगा तो उसके लिए जिस जगह का वादा है, वह तो आग है। अतः तुम्हें इसके विषय में कोई सन्देह न हो। यह तुम्हारे रब की ओर से सत्य है, किन्तु अधिकतर लोग मानते नहीं
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