قال لهما يوسف: لا يأتيكما طعام ترزقانه في حال من الأحوال إلا أخبرتكما بتفسيره قبل أن يأتيكما، ذلكما التعبير الذي سأعبِّره لكما مما علَّمني ربي؛ إني آمنت به، وأخلصت له العبادة، وابتعدت عن دين قوم لا يؤمنون بالله، وهم بالبعث والحساب جاحدون.
مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف
تفسير الجلالين
«قال» لهما مخبرا أنه عالم بتعبير الرؤيا «لا يأتيكما طعام ترزقانه» في منامكما «إلا نبأتكما بتأويله» في اليقظة «قبل أن يأتيكما» تأويله «ذلكما مما علمني ربي» فيه حث على إيمانهما ثم قوّاه بقوله «إني تركت ملة» دين «قوم لا يؤمنون بالله وهم بالآخرة هم» تأكيد «كافرون».
उसने कहा, "जो भोजन तुम्हें मिला करता है वह तुम्हारे पास नहीं आ पाएगा, उसके तुम्हारे पास आने से पहले ही मैं तुम्हें इसका अर्थ बता दूँगा। यह उन बातों में से है, जो मेरे रब ने मुझे सिखाई है। मैं तो उन लोगों का तरीक़ा छोड़कर, जो अल्लाह को नहीं मानते और जो आख़िरत (परलोक) का इनकार करते हैं,
ترجمة المعاني ليست قرآنًا، بل محاولة لنقل معناه إلى لسان آخر.